Sunday, September 7, 2014

एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला -DEVELOPING VEDIC GROSS NATIONAL HAPPINESS POLICY

वेदव्यास संस्कृत की पुनःसंरचना योजना
के अधीन आयोजित
एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला

वैदिक सकल सुख सम्पद् सूची निर्माण एवम् नीति निर्माण
DEVELOPING VEDIC GROSS NATIONAL HAPPINESS POLICY

दिनाङ्क- १३ - ०९- २०१४, दिन -- शनिवार
स्थान न्यू सेमिनार हाल,  समय प्रातः १०.०० बजे
आयोजक - संस्कृत विभाग, सनातन् धर्म कालेज , (लाहौर), अम्बाला छावनी।  
अकादमिक सहयोग एवम् समर्थन सनातन धर्म रिसर्च एण्ड डेवेल्पमेण्ट सेण्टर, अम्बाला ।
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मान्यवर,
उपरोक्त विषय के स्थान, तिथि एवम् समय  के सम्बन्ध में  आप सादर सस्नेह  सार्थक उपयोगितापूर्ण लाभ पुरुषार्थकारी सम्वाद  के लिए कार्यशाला में आमन्त्रित हैं ।
वैदिक जी० एन० एच०पालिसी विचार का मूल आधार -
ब्रह्मन्ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायतामा राष्ट्रे राजन्यः शूर इषव्योऽतिव्याधी महारथो जायतां दोग्ध्री धेनुवोढानड्वानाशुः सप्तिः पुरन्धिर्योषा  जिष्णू रथेष्ठाः सभेयो युवास्य यजमानस्य वीरो जायतां निकमेनिकामे नः पर्जन्यो वर्षतु फ़लवत्यो न ओषधयः पच्यन्तां योगक्षेमो नः कल्पताम्॥ माध्यन्दिन शुक्ल यजुर्वेद, २२.२२ समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः । समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति ॥ ऋग्वेद, मण्डल १०, सूक्त १९१, ऋचा ४
वैदिक जी०एन०एच० नीति  क्या है ?
The goal of a society should be the integration of material development with psychological, cultural, and spiritual aspects – all in harmony with the Earth.

इस  वैदिक जी० एन० एच० का  सार और रूप (form and essence) क्या है जिसके आधार पर इसकी दशा और दिशा का मूल्यांकन किया जाना चाहिए -  वह  सम्भवतः  तीन स्तरों पर हो सकता है
  • एक है भौगोलिक आर्थिक-जैविक स्तर पर,
  • दूसरा ऐतिहासिक अविच्छिन्न विकास के स्तर पर और
  • तीसरा है अचल मूल्यों के स्तर पर ।

प्रथम स्तर पर वैदिक जी० एन० एच०  'काम' और 'अर्थ' सिद्ध करने में सहायता कर सकता है, दूसरे स्तर पर धर्म नामक पुरुषार्थ को सिद्ध करने में सहायता कर सकता है और तीसरे स्तर पर मोक्षधर्म अर्थात् शुद्ध आनन्द जो ऑंशिक रूप से उत्सव, क्रीड़ा, कला, संगीत,
साहित्य में और पूर्ण रूप से जीवन को यज्ञार्पित रूप से जीने के मूल्यों की स्थापना करने में योगदान कर सकता है जैसे गान्धी, विनोबा, अरविन्द, विवेकानन्दआदि ने किया ।

वैदिक जी०एन०एच० का सार जितना आध्यात्मवादी है उतना ही भौतिकवादी भी है। यह इहलोकवादी एवम् कामना प्रधान हैं परन्तु साथ ही साथ श्रद्धा सम्पृक्त एवम् रहस्यप्रवण भी है। इस प्रकार के वैदिक जी० एन० एच० का आविर्भाव सम्भवत: भय, लोभ से ही नहीं बल्कि सौन्दर्यबोध और रहस्यबोध से भी हुआ हैं। इसका प्रस्थान बिन्दु प्राग्वैदिक है परन्तु वह वैदिक और वैदिकोत्तर दोनों के साथ-साथ आज भी प्रवाहमान है क्योंकि रहस्यबोध, सौन्दर्यबोध तथा श्रद्धा-बोध भी क्षुधा, तृषा की तरह मनुष्य की सहजात वृत्ति है। इसलिए वैदिक जी० एन० एच० मुट्ठी भर पढ़े लिखे, शिक्षित लोगों की सम्पत्ति नहीं है, बल्कि जनसमूह की दृष्टिभङ्गी है, यह जनसमूह की विश्व दृष्टि है। यह वैदिक जी० एन० एच० समस्त जीवन प्रक्रिया को समाविष्ट किए हुए और धारण किए हुए चलता है - चूल्हा, चक्की, शिल्प से लेकर नृत्य गीत आदि तक इसका विस्तार है। इसलिए  वैदिक जी० एन० एच० के विषय में यह कहना सम्भव है कि -
  1. वैदिक जी० एन० एच०पालिसी/ नीति अपौरुषेय हैं क्योंकि इनका जनक व्यक्ति नहीं परम्परा है।
  2. दूसरा वैदिक जी०एन०एच० का अर्थ लोकविद्या है।
  3. तीसरा वैदिक जी०एन०एच० की दृष्टिभङ्गी कामना प्रधान और सुखवादी होने के साथ-साथ अध्यात्मवादी है।
  4. चौथे वैदिक जी०एन०एच० रसवादी ओर वर्गनिरपेक्ष है।
  5. पांचवे वैदिक जी०एन० एच० सेक्यूलर, उदार और साम्प्रदायिकता निरपेक्ष है और
  6. अन्तिम वैदिक जी०एन०एच० में जिज्ञासा, रहस्यबोध, सौन्दर्यबोध और आदिम भय - इनमें सहोदर रूप से निहित हैं।
उपविषय -
1) PSYCHOLOGICAL WELL-BEING मनः-स्वस्थता  
 2) HEALTH आरोग्य 
3) USE OF TIME समय उपयोग
 4) COMMUNITY VITALITY सामाजिक गतिशीलता /अग्रसरता
 5) EDUCATION शिक्षा/ प्रशिक्षण/ विद्या
 6) CULTURE संस्कृति
7) ENVIRONMENT पर्यावरण
 8) GOVERNANCE सुशासन
 9) STANDARD OF LIVING जीवन स्तर

ध्यातव्य - 
१.        यह कार्यशाला है इसमें भाषण की अनुमति नहीं है और न ही मुख्यवक्ता होगा। केवल कार्यकारी सचिव सम्वाद की मर्यादा, प्रदत्त कार्य को अग्रसर करने के निमित्त अधिकृत होगा । 
२.       कृपया वैदिक वाङ्मय से मुख्य विषय के अधीन उपरोक्त उपविषयों पर यथासम्भव प्रामाणिक सामग्री हिन्दी / अंग्रेजी अनुवाद एवम् सन्दर्भ सहित प्रस्तुत करें।
३.       यह कार्यशाला संस्कृतज्ञों द्वारा राष्ट्रिय नीति प्रस्तुत करने का विगत ६८ वर्षों मे प्रथम उपयोगितापूर्ण एवम् लाभपुरुषार्थकारी दुःसाहसपूर्ण प्रयास होगा, अतः सम्वाद और विषय की कठिनाइयों को चुनौति के रूप स्वीकार करें।  
४.       किसी भी प्रकार का यात्रा / मार्ग व्यय देने की व्यवस्था नहीं है। मार्गव्यय आपकी मातृसंस्था द्वारा देय होगा।
५.       अपनी प्रतिभागिता की पूर्व सूचना १०-०९-२०१४ तक दूरभाष अथवा ई-संकेत द्वरा अनिवार्य रूप से प्रेषित करें अन्यथा कार्यशाला में निश्चित स्थान एवम् समय प्रदान करना सम्भव आयोजकों के लिए सम्भव नहीं होगा।  
६.       कृपया समय का सम्मान आवश्यक रूप से करें।


आशुतोष आंगिरस                                                                                  डा० देश बन्धु
समन्वयक                                                                                                                     प्राचार्य
संस्कृत विभाग                                                                                                         स० ध० कालेज (लाहौर)
०९८९६३-९४५६९, ०९४६४५५८६६७

ई-संकेत- sanskrit2010@gmail.com, www.sanatansanskrit.in

Friday, November 29, 2013

भारतीय सुरक्षा को खतरे एवम् युद्ध-सन्नद्धता का मूल्याँकन





COMPUTATIONAL SANSKRIT – ISSUES & CHALLANGES संङगणकीय-संसकृतम् – समभावनाएँ एवम् चुनौितयाँ

सनातन धर्म कालेज (लाहौर), अम्बाला छावनी
(संस्कृत की पुनःसंरचना योजना के अधीन)
TWO DAYS NATIONAL CONFERENCE
ON
COMPUTATIONAL SANSKRIT – ISSUES & CHALLENGES
संङगणकीय-संस्कृतम् – सम्भावनाएँ एवम् चुनौतियाँ
Organized by- Departments of Sanskrit & Computer Science& Electronics
Sponsored by – Director General, Higher Education of Haryana.
Date – 20-21 December, 2013. Timing – 9.00 A.M. TO 5.00 P.M.
“In ancient India the intention to discover truth was so consuming, that in the process, they
discovered perhaps the most perfect tool for fulfilling such a search that the world has ever
known—the Sanskrit language.”

Dear Sir/ Madam,

Under the “Restructuring Sanskrit Scheme” of Department of Sanskrit along with
Department of Computer Science & electronics, we cordially invite you to participate in two days
national conference on the above said topic.
Conference Objectives
1. To highlight the scope of computer technologies in Indian Languages
2. To open up the dialog between Sanskrit Linguists and Computer Researchers.
3. To make use of the principles and techniques available in Sanskrit (Nyaaya, Vyakarana,
Sahitya Shastra ) for developing new paradigms for the computer industry.
4. To invite inter disciplinary researchers, scholars, academacians to exploer and share Issues
& Challenges in computational Sanskrit & Sanskrit computational.
5. To develop packages for training for the faculties in the Computer Industry and Shaastric
world.
Conference Schedule: 20 Dec, 2013
Registration of Delegates 09.00am – 10.00 am
Inaugural Session 10.00 am - 11.00 am
Tea Break 11.00 am-11.15 am
Technical Session I 11.15 am- 01.30 pm
Lunch 01.30 pm- 02.00 pm
Technical Session II 02.00 pm- 03.45 pm
Tea Break 03.45 pm- 04.00 pm
Technical Session III 04.00 pm- 05.00 pm
Conference Schedule: 21 Dec, 2013
Technical Session IV 09.30am- 11.00 am
Tea Break 11.00 am- 11.15 am
Technical Session V 11.15 am- 01.30 pm
Lunch 01.30 pm- 02.00 pm
Technical Session VI 02.00 pm- 03.45 pm
Tea Break 03.45 pm- 04.00 pm
Valedictory Session 04.00 pm - 05.00 pm
Call For Papers
This is an academic event under the “Restructuring Sanskrit Scheme” sponsored by Directorate
General of Higher Education of Haryana. We cordially invite paper submission in the topics but
not limited to following research areas:
1. Computational Linguistics
2. Natural language Processing
3. Parsing & Tagging
4. Grammar Engineering
5. Information Computing
6. Phonology, Morphology
7. Text Mining
8. Sentence and Discourse Analysis
9. Search Engine for NLP
10. Information Retrieval and Question
Answering
11. Language Translation through Web
12. Social Media Analysis and Processing
13. Semantic Processing
Important Dates
Participation Confirmation at sanskritcomputational@gmail.com Dec 10, 2013
Paper Submission (soft copy in IEEE format strictly)at sanskritcomputational@gmail.com Dec 10, 2013
Acceptance Intimation on E mail Dec 16, 2013
Camera ready copy & Copyright Form Dec 17, 2013
PS-
1. Kindly be punctual & No TA /DA admissible.
2. Registration fee only for the published papers (Rs 300 per research paper).
3. Intimation for accommodation (on payment basis) if required need to be confirmed by Dec10, 2013.

Dr. Kavita Taneja     Dr. Rajinder Singh Rana    Dr. Ashutosh Angiras     Dr. Desh Bandhu
Coordinator              Convener                          Organizing Secretary      Principal
08059044445          09466596782                    09896394569             09812053283

Wednesday, November 6, 2013

२०१३ अमावस की दीपावली

२०१३ अमावस की दीपावली
 
मित्र मेरे !
हर बार की तरह
इस बार भी तुम
घर की चारदीवारी और आंगन में शायद
कुछ मिट्टी के दीए
सरसों के तेल में भीगी
रुई की बत्तियाँ जलाओगे
लेकिन मित्र,
अगर हो सके तो इस बार
कम से कम एक बार तो
एक दीया जलाना
किसी अन्जान गरीब के घर
एक अस्पताल में तो एक सिनेमाघर में
एक विद्यालय में तो एक फ़ैक्टरी में
एक कारपरेट हाऊस में तो एक अनाथालय में
एक  जलाना संसद में तो एक माओ के घर
एक तो जरूर जलाना किसी अमीर बहुत अमीर के घर
और फ़िर यदि  कुछ बच जाएं दीए
तो जलाना
मानवीय सम्बन्धों के और सम्वेदनाओं के नाम
लोकतन्त्र, देश , शहीदों के नाम
मनुष्यता और ज्ञान और प्रेम के नाम
और इस सबके लिए तुम्हें संविधान से पूछने की जरूरत नहीं
न ही कानून के सहारे की आड़ चाहिए
सिर्फ़ मेरे विश्वास के लिए
एक सिर्फ़ सद्भावना के लिए
एक बार एक एक दीए तो जला ही दो

मित्र! क्या तुम जलाओगे वो दीए इस बार???

“सद्भावना”



मित्र !
खोजने चलोगे क्या तुम
मेरे साथ
एक शब्द नया
सद्भावना के लिए
अर्थ यदि शेष अवशेष की तरह
बच रहे हों कहीं
उस शब्द के अर्थ की
आकृति
बहुत कुछ खण्डित है
धूल भी पर्त दर पर्त चढ़ी है बहुत
तलाशेंगे भी कहाँ निश्चित नहीं अभी
लेकिन चलते हैं, निकलते हैं
कदम पहला जिधर पड़ेगा दिशा वही बनेगी
और फ़िर
पहले ही बढ़े पग पर भी तो खॊजना होगा
अनुभवों की काई में
शास्त्र की अंगड़ाई में
युक्ति की चतुराई में
कानून की अकड़ाई में
सम्बन्धों की कड़वाई में
विश्वासों की खटाई में
वासना की परछाईं में
या
प्रेम-घृणा की सच्चिआई में
फ़िर भी लगे मुश्किल तो
जंगल की उलझी कंटीली झाड़ियों से
पकड़ लेना सुनहरी पंखों वाली
तितली
और तुम विश्वस्त हो के
लौट आना वापिस बिना झिझक
और कह देना
तुम्हें सब पता है
सब जानते औ’ समझते हो?

मित्र !